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 आप हिम्मत का एक कदम बढाओं तो परमात्मा की सम्पूर्ण मदद आपके साथ होगी !

ख़ुशी के रचयिता हम स्वयं है 2 तू मेरा ध्यान कर, तेरा ध्यान मै रखूँगा

           तू मेरा ध्यान कर, तेरा ध्यान मै रखूँगा महाकाल ने बचाया काल से :-   एक गाँव से जब यह यात्रा गुजर रही थी तो गीतों कि आवाज सुनकर एक भैसा बहुत आवेश में आ गया और काल कि भांति बिना   रोके हमारी तरफ आने लगा | उस समय मै महाकार (शिव) कि स्मृति में साईकिल चला रहा था कि अचानक   भैसा साईकिल से टकरा गया | टक्कर इतनी तेज थी कि साईकिल के पीछे पानी कि बोतल रखी थी, जब वह फूटी और पानी कि बुँदे मुझ पर पड़ी तो उस क्षण लगा कि काल का बुलावा आ गया है परन्तु जो महाकाल (शिव) कि स्मृति में समाया हो उसे तो काल भी छु नहीं सकता | महाकाल शिव परमात्मा ने मुझे काल के पंजे से छुड़ा लिया | मै एकदम ठीक था और मामूली सी भी चोट नहीं लगी थी | इसके बाद बिना विचलित हुए साईकिल को ठीक करवाकर गंतव्य कि ओर प्रस्थान किया | कवच बनकर कि रक्षा :- आगे चलकर सांपला गाँव में एक सार्वजनिक कार्यक्रम रखा गया जिसमे मंच सञ्चालन का कार्यभार मुझ पर था सब कुछ परमात्म स्मृति में ठीक-ठाक चल रहा था | जो भाई कार्यक्रम कि वीडियो   बना रहा था उसने मंच कि तरफ कैम...

बुरे ब्यक्ति का जीवन राजयोग ही बदल सकता है

जानें, 100 मर्डर करने वाला 1 करोड़ का इनामी डाकू कैसे बना ‘महात्मा’ ग्वालियर.खूंखार डाकू,चंबल के बीहड़ों का राजा,550 डाकुओं का सरदार और लगभग 125 कत्लों के आरोप में भारत सरकार द्वारा दो करोड़ रुपए का इनामी *डाकू पंचम सिंह* Dacoit Pancham Singh आज का राजयोगी बन चुका है। अब लोगों के मन को परिवर्तित करने में अपना जीवन व्यतीत कर रहा है। कभी चंबल के बीहड़ों में बंदूक की नोक पर दहशत का पर्याय रहा डाकू सरदार पंचम सिंह राजयोगी बनने के बाद देशभर में अध्यात्म की अलख जगा रहा है। पंचम ने अध्यात्म और आत्मविश्वास के बल पर जिंदगी बदलने के गुर सिखाए। 550 डाकुओं ने किया था समर्पण चंबल के बीहड़ों में दहशत के रूप में कुख्यात पंचमसिंह जमीनदारों के सताने पर परिवार का बदला लेने के लिए डाकू बने। पंचायत चुनाव के दौरान एक पक्ष का समर्थन करने पर विरोधी गुट के लोगों ने इतना बेरहमी से पीटा कि लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। इलाज के बाद जब गांव लौटा तो ग्रामीणों पर उत्पीडऩ शुरू हो चुका था। विरोधी गुट हावी था। हर किसी का जीना दुश्वार था। फिर क्या था कूद पड़े चंबल के बीहड़ों में 12 डाकु...

ईश्वरीय प्रेम का अनोखा रस

                                               ईश्वरीय प्रेम का अनोखा रस शारीरिक, लौकिक अथवा नस्वर सम्बन्धो का रस तो हमने जन्म जन्मान्तर लिया है परन्तु परमात्मा का सम्बोधन करते हुए हम गाते आये है कि हे प्रभु, आप ही हमरे मात-पिता, सखा स्वामी, विद्याप्रदाता और हमारे सर्वस्व (त्वमेव माता च पिता त्वमेव) हो क्या उन सम्बन्धो का अनुभव हमने किया है? जो ऐसे गायन-योग्य , मधुर सम्बन्ध है उनका हम अनुभव ही न करे यह तो गफलत और अल्बेलेपन का सूचक है | जिस प्रभु को प्यार का सागर कहा जाता है, उनको अनोखे प्यार का रस ही जिसने न लिया हो वह कितना भाग्यहीन है | उन जैसा साचा प्यार जिसमे सभी संबंधो कि रसना भरी हुई हो, कोई दे ही नहीं सकता तब यदि वह प्यार हमने न पाया तो क्या पाया?       मुझे अनुभव है कि जब हम किसी ऐसे बच्चे से बात करते है जिसकी माता या पिता का साया उसके सर से उठ गया हो तो माता या पिता के बारे म...
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