तू मेरा ध्यान कर, तेरा ध्यान मै रखूँगा
महाकाल ने बचाया काल से :- एक गाँव से जब यह यात्रा गुजर रही थी तो गीतों
कि आवाज सुनकर एक भैसा बहुत आवेश में आ गया और काल कि भांति बिना रोके हमारी तरफ आने लगा | उस समय मै महाकार
(शिव) कि स्मृति में साईकिल चला रहा था कि अचानक
भैसा साईकिल से टकरा गया | टक्कर इतनी तेज थी कि साईकिल के पीछे पानी कि
बोतल रखी थी, जब वह फूटी और पानी कि बुँदे मुझ पर पड़ी तो उस क्षण लगा कि काल का
बुलावा आ गया है परन्तु जो महाकाल (शिव) कि स्मृति में समाया हो उसे तो काल भी छु
नहीं सकता | महाकाल शिव परमात्मा ने मुझे काल के पंजे से छुड़ा लिया | मै एकदम ठीक
था और मामूली सी भी चोट नहीं लगी थी | इसके बाद बिना विचलित हुए साईकिल को ठीक
करवाकर गंतव्य कि ओर प्रस्थान किया |
कवच बनकर कि रक्षा :- आगे चलकर सांपला
गाँव में एक सार्वजनिक कार्यक्रम रखा गया जिसमे मंच सञ्चालन का कार्यभार मुझ पर था
सब कुछ परमात्म स्मृति में ठीक-ठाक चल रहा था | जो भाई कार्यक्रम कि वीडियो बना रहा था उसने मंच कि तरफ कैमरे का फोकस किया
और अचानक कैमरे के पास लगी फोकस लाइट चटक (फूट) मर मेरे ऊपर आ गिरी | परमात्म स्मृति कि लहर में, बिना अवस्था को
डगमगाए मैंने उसे अपने ऊपर से हटा दिया | फोकस लाइट का वह टुकड़ा सामने रखी कापी (Note book) पर गिर गया | गिरते
ही कापी का पेज जल गया | ऐसा लग रहा था कि कोई कवच बनकर रक्षा कर रहा है | दिल से
बारंबार उस परमात्मा का सुक्रिया निकल रहा था और परमात्मा के महावाक्य याद आ रहे
थे ‘तू मेरा ध्यान कर ,
तेरा मै रखूँगा |
अपनी सारी आशाए
भगवान पर छोड़ दे, ता
किसी भी व्यक्ति से कोई निराशा नहीं मिलेगी
ख़ुशी के रचयिता हम स्वयं है
हमने
जो मान्यता (बिलीफ सिस्ट) बना ली है उसके अनुसार हम खुशी को सारा दिन भविष्य मे
ढूढते रहे है | हम यही कहते है कि यह होगा
तो मै खुश हो जाऊँगी | आज हम पीछे मुड़कर देखते है तो यही कहते है कि विद्यार्थी
जीवन सबसे अच्छा है परन्तु जब विद्यार्थी जीवन में होते है तब यही कहते है कि जब
स्कूल पढाई ख़त्म हो जाएगी , जब कालेज में जाऊँगी या जब नौकरी मिल जायगी तब मै खुश
होउंगी | जैसे ही मैंने कहा कि जब खुश नहीं हूँ | हमारी पढाई भी समाप्त हो गयी,
फिर हम जोकरी में आ गए, फिर हमने सोचा अच्छा जब मई एक से दो यानि सहभागी हो
जाऊँगी, जब मई सम्बन्ध बना लूंगी तब खुश हो जाऊँगी | फिर वो रिश्ता हुआ , फिर हमने
कहा जब हमारा परिवार हो जायेगा ता मई खुश हो जाऊँगी इसका मतलब है कि हर बार हमारी
ख़ुशी स्थगित होती गई, अब यह कब होगी ?
हम कहते है कि
वो वाले जो दिन थे ना, बहुत अच्छे थे | मई वर्तमान में हूँ और खुसी को जो होने
वाला है या फिर जो हो ज्ञान उसमे ढूढती हूँ | अगर मै यहाँ खड़ी होकर कह रही हूँ कि
जो हो गया वह बहुत अच्छा, पर उस समय मई कब खुश हुई थी, उस समय मै इस सोच के साथ
बैठी थी कि जब यह होगा, तब मै खुश हो जाऊँगी | वर्तमान में रहकर हम हर पल या तो
बीते हुए पल के बारे में सोच रहे होते है या फिर आने वाले पल के बारे में |
एक दिन आप अपने
विचारो कि जाँच करे , आप पाएंगे कि या तो वो बीती हुई बात से सम्बन्धित होते है या
आने वाले समय से सम्बंधित होते है | फिर हम खुसी के लिए निर्भर हो जाते है कि कुछ
नया होगा तब खुसी मिलेगी, इस प्रक्रिया में मेरा एक एक पल बीतता गया, यह कहते हुए
कि अगले पल वो खुसी आने वाली है, जब कुछ ऐसा होगा तब मुझे खुसी मिलेगी | ऐसी खुसी
किसी प्राप्ति पर, हम हो काम करते है उस पर, लोगो के O;ogkj पर साधनों पर निर्भर है | जब
हमारी किसी चीज पर निर्भरता है तो हम खुश कैसे रह सकते है |
भय और खुसी
दोनों एक स्थ नहीं रह सकते है | यदि हम दर में है तो खुश नहीं रह सकते है | मान
लीजिये कि मेरी खशी आप पर निर्भर है तो मै हमेशा डर में रहूंगी कि ये ठीक है ये
मेरे से नाराज तो नहीं हुए, ये खुश है ना, ये संतुष्ट है ना मई इनको खुश रखने के
लिए क्या करूँ , तो यह डर है , असुरक्षा है | जहाँ निर्भरता होगी वहां असुरक्षा कि
भावना तो होगी ही | अगर मेरी ख़ुशी साधनों पर निर्भर है तो हम सारा दिन उनके अरे
में ही सोचते रहेंगे |
इतनी मेहनत
करते हुए भी हम खुश नहीं है तो इसका सिर्फ
एक ही कारन है निर्भरता | हमने अपने-आपको परिस्थितियों पर, लोगो पर, वस्तुओ
पर, न मालूम किन – किन चीजो पर निर्भर
करके रखा है | जा हम इतनी चीजो पर निर्भर होंगे तो खुसी ................?
एक है
, जो मै बहार करती हूँ और एक है ,जो मै करते हुए अंदर महसूस करती हूँ | मै आपके
लिए अच्छा खाना बना रही हूँ लेकिन अंदर से डर में हूँ तो कौन से प्रकम्पन निर्मित
होंगे ? कोई आ रह है, हम दस चीजो बना दे खाने के लिए लेकिन अन्दर कौन-सी उर्जा
निर्मित हुई , इसका भी ध्यान रखना है | जब अन्दर सकारात्मक उर्जा निर्मित होगी ,
तो कर्म कभी भी गलत नहीं होंगे | अहि क्या है, मैआपके ऊपर निर्भर हूँ या मैआपको
बहुत ज्यादा खुश करने कि कोशिश करती हूँ, फिर अगर आप थोड़ा सा दुखी हो गए या आप
मुझसे खुश नहीं हुए तो मै एकदम से प्रतिक्रिया करके आपसे अलग हो जाती हूँ | जा हम
अन्दर से दर्द में होते है तो मुझे अच्छा बोलने के लिए, अच्छा करने के लिए बहुत
मेहनत करनी पड़ती है | अगर मै शांत हूँ, स्थिर हूँ तो मेरी खुसी अपने हाथ में है |
मुझे आपको खुश नहीं करना है मुझे खुश रहना हैअगर मै खुश रहूंगी तो मेरे प्रकम्पन
सही होंगे, इर यह संभव ही नहीं है कि मेरे कुख से कोई गलत शब्द निकलेगा क्योंकि
मेरे बोल , मेरे कर्म का बीज आत्मा में है |
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