क्रोध और हम क्रोध का नाम लेते ही हमारे सामने एक ऐसा चेहरा आता है जिसकी आँखे लाल,भौहें तानी,मूछें बड़ी-बड़ी है | इस चेहरे के प्रति हमारा भाव नफरत और भय का मिला – जुला होता है लेकिन हममे से कोई भी ऐसा नहीं होगा जिसे क्रोध का अनुभव ना हो | वैसे तो क्रोध को भूत, अग्नि,चांडाल आदि नाम दिए जाते है फिर भी हम हर छोटी-छोटी बात पर क्रोध करते है और हमें पता ही नहीं चलता कि यह अनचाहा मेहमान कब आ जाता है | हम दिन में कई बार इसकी मेहमान नवाजी करते है चाहे रात के 12 बजे हो या दिन के 2, इसके आने-जाने के दरवाजे 24 घंटे खुले है | क्रोध का औचित्य हम सौ के नोट को जेब में रख कर फिर चेक करते है क...