इस द्रश्य जगत में मनुष्यों का वस्तु और व्यक्तियों से कुछ न कुछ जुड़ाव अथवा रिश्ता बन ही जाता है | देह आत्मा को सबसे पहले बांधने वाली और खीचने वाली है | निज शरीर से रिश्ता मृत्यु तक नहीं छूट पाटा, इसी प्रकार से देह के संबंधो की लम्बी सूची है, देह संबंधो के ये रिश्ते अथवा नाते ममत्व अथवा मोह के बंधन में परस्पर लगाव और आकर्षण में बांधने वाले है | मनुष्य संसार में जीवनयापन के लिए अनेकानेक साधनों को अपनाता है और इन साधनों से भी उसका लगाव व् मोह हो जाता है | पद,पैसा,मान-शान,जीव-जंतु इनमे भी कही न कही मन की रगे जुडी रहती है | दुनिया के रिश्ते जितनी सहजता से बनते है, वे बनकर मिटते नहीं है | देह व् देह के संबंधो में कदम-कदम पर अपेक्षा और निहित स्वार्थ जुड़े रहते है | इस प्रकार देह और देह के पदार्थो के रिश्ते व्यक्ति को इस भौतिक जगत से न्यारा और उपराम होने नहीं देते, उसका मन और बुद्धि बार-बार विनाशी व्यक्ति और वस्तु में उलझते रहते है | इसलिए एक सांसारिक व्यक्ति के लिए फ़रिश्ता बनना बहुत असंभव कार्य है | ...