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 आप हिम्मत का एक कदम बढाओं तो परमात्मा की सम्पूर्ण मदद आपके साथ होगी !

Avyakt Bapdada Milan 2018

Avyakt BaapDada Milan 2019

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अपने मन से भय को भगाए दूर

                     हम सभी अपने जीवन में जाने-अनजाने भय से रूबरू होते है | कभी यह ज्ञात का भय होता है तो कभी अज्ञात का | हम अपने भय से निजात पाना चाहते है | भय को भागने के लिए सबसे पहले स्वयं का आत्म विश्लेषण करे कि हमारे दर का कारण क्या है | जब हम अपने दर का कारण समझ जाते है तो हमारे लिए उसका सामना करना आसान हो जाता है |                                                   कई बार अमरे मन का दर अतीत में हुई किसी पुरानी घटना की वजह से भी जन्म लेता है | उदाहरण के लिए, अगर भूतकाल में कभी आपको कुत्ते ने काटा हो तो कुत्ते को देखते ही मन की स्मृति की पुरानी फ़ाइल सामने आ जाती है और भय सताता है | कुछेक बार भय का कारण किसी व्यक्ति से विशेष लगाव हो सकता है जिस कारण उसे खो देने का भय हमें सत...

संकल्पवान और संकल्पहीन

कि सी ने सत्य कहा है, “यह दुनिया संकल्पवानो की है, संकल्पहीन तो यूँ ही भूमि का भर बढाया करते है |” जैसे बलवान और बलहीन का अंतर स्पष्ट है किसी भी परिस्थिति में , प्रतिकूलता में भी जो धारण किये हुए श्रेष्ठ संकल्पों को द्रढ़ता से पकडे रहता है, उनको क्रियान्वित करता रहता है , वह है संकल्पवान और जो विपरीत परिस्थितियों के झोकों में या अल्बेलेपन में या लापरवाही में अपने श्रेष्ठ संकल्पों को त्याग देता है, भुला देता है या ढीले कर देता है वह है संकल्पहीन | संकल्प की द्रढ़ता पर जीवन की उन्नति-अवनति निर्भर है | मजबूत संकल्प वाले की मंजिल की और गति द्रुत होती है और संकल्प में दिल आने से गति भी लंगडाती –लड़खड़ाती नजर आती है | गति में भय और संशय द्रश्यमान होता है, लगता है जैसे कोई जबरदस्ती घसीटे जा रहा है                                                            ...

बुरे ब्यक्ति का जीवन राजयोग ही बदल सकता है

जानें, 100 मर्डर करने वाला 1 करोड़ का इनामी डाकू कैसे बना ‘महात्मा’ ग्वालियर.खूंखार डाकू,चंबल के बीहड़ों का राजा,550 डाकुओं का सरदार और लगभग 125 कत्लों के आरोप में भारत सरकार द्वारा दो करोड़ रुपए का इनामी *डाकू पंचम सिंह* Dacoit Pancham Singh आज का राजयोगी बन चुका है। अब लोगों के मन को परिवर्तित करने में अपना जीवन व्यतीत कर रहा है। कभी चंबल के बीहड़ों में बंदूक की नोक पर दहशत का पर्याय रहा डाकू सरदार पंचम सिंह राजयोगी बनने के बाद देशभर में अध्यात्म की अलख जगा रहा है। पंचम ने अध्यात्म और आत्मविश्वास के बल पर जिंदगी बदलने के गुर सिखाए। 550 डाकुओं ने किया था समर्पण चंबल के बीहड़ों में दहशत के रूप में कुख्यात पंचमसिंह जमीनदारों के सताने पर परिवार का बदला लेने के लिए डाकू बने। पंचायत चुनाव के दौरान एक पक्ष का समर्थन करने पर विरोधी गुट के लोगों ने इतना बेरहमी से पीटा कि लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। इलाज के बाद जब गांव लौटा तो ग्रामीणों पर उत्पीडऩ शुरू हो चुका था। विरोधी गुट हावी था। हर किसी का जीना दुश्वार था। फिर क्या था कूद पड़े चंबल के बीहड़ों में 12 डाकु...

मुस्कुराने से सभी मुश्किले दूर हो जाती है

       मुस्कुराने से सभी मुश्किले दूर हो जाती है                          ऐसे करे इर्ष्या का उन्मूलन  उपलब्ध इतिहास का अध्ययन करने पर हम पाते है कि बहुत सी स्थितियों में मात्र इर्ष्या विकार ने इतिहास को नकारात्मक रूप दे दिया है | इर्ष्या क्या है ? इर्ष्या क्यों पैदा होती है ? इर्ष्या का मनोवैज्ञानिक पहलु क्या है ? इर्ष्या के कार्यक्षेत्र कौन- कौन से है ? इर्ष्या कैसे दूर हो सकती है?आइये इन प्रश्नों के उत्तर खोजे | इर्ष्या एक नकारात्मक विचार है जैसे कि यह इअसा क्यों है ? मैंने इतना कुछ किया , मुझे इतना कम क्यों ? इसने तो बहुत कम किया इसे,इतना ज्यादा क्यों? इसे मुझसे ज्यादा क्यों मिला? इसके पास ये-ये प्राप्तियां ज्यादा क्यों है? ये सब इर्ष्या के विचार है | इर्ष्या का अर्थ है , अन्य किसी कि स्थूल सूक्ष्म जो भी प्राप्तियां है उनके प्रति स्वीकार्य भाव का नहीं होना | किसी कि भी , क...

मै कहाँ खो गया हूँ.............?

जब हम किसी भी प्रोफेशनल या आम व्यक्ति से बात करते है तो वो अपनी समस्याओं के बारे में, परिस्थतियों के बारे में और कठिनाइयों की ही बात करता है | वो अपनी सूझ-बूझ, अपने परसेप्शन और मान्यताओं के आधार से उसके हल भी ढूँढने की कोशिश करता है, परन्तु वो अपनी उन कठिनाइयों को दूर करने के चक्कर में और ही उलझता जाता है | वो अपनी आकांक्षाओं,इच्छाओं व् सामाजिक,पारिवारिक दायित्व के निर्वहन हेतु कई शार्ट कट का रास्ता भी अपनाने की कोशिश करता है | परिणामस्वरूप वो अपनी उलझनों के भंवर में और ही उलझता हुआ अपने को पाटा है | उदाहरण स्वरुप,किसी व्यक्ति के घर में चूहे बहुत थे और खाघ पदार्थ को नुक्सान पहुंचाते थे | तो किसी ने कहा कि ऐसा करो, एक बिल्ली को पाल लो, जिससे आपकी समस्या हल हो जायेगी | वो बिल्ली ले आया, बिल्ली चूहे को तो खा जाती , लेकिन साथ ही उसका रखा हुआ दूध भी पि जाती | वो फिर परेशान होने लगा | फिर किसी और ने सलाह दी कि ऐसा करो की कुत्ता पाल लो | कुत्ते के कारण तो बिल्ली भाग गयी, लेकिन कुत्ता सारा दिन भौं-भौं करके उसका सर दर्द कर देता था | आज वैसी ही हालत हम सबकी है | हम ढूंढनातो चाहते है हल...

Change your Mind and Change your World

  Change your Mind and Change your World   What did Gandhi Nelson Mandela and mother Teresa have in common? They all knew that how you see the world is how you create the world!                    You can change the world sounds like an impossible claim, but it’s quite simple really. How you see the world is how you create the world. If you believe the world is a dark and dangerous place you will perceive (which means see and create) events and circumstances as a threat. Where? In your own mind. Your thoughts and feelings will be negative and you will radiate fear into your relationship and into the world. Your perception is your reality. It is also your choice.           On the other hand, if you believe the world is an adventure Playground you will ‘see’ and ‘create’ (perceive) events and circumstances as and opportunity to play and b...

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