मम्मा ने ही मुझे योग सिखाया और योग्य बनाया ये कहानी दादी धैर्यमणि कि कहानी है जो हमें अतीत अनुभव कराती है, आइये जानते है दादी धैर्यमणि कि कहानी | क्या थी ? सन 1937 में मै पहली पहली बार अपनी बहन भगवती के साथ बाबा-मम्मा के सत्संग में गई | जाते ही मुझे मम्मा ने देख लिया गले लगाया , टोली खिलाई एवं मुस्कुराई | मै भी मुस्कुराई तो मम्मा ने कहा, कल भी आना | मै उस दिन से रोज जाती रही और ज्ञान सुनकर बहुत अच्छा लगा | मम्मा ही मुझे ज्ञान प्राप्त करने तथा यज्ञ में लाने के लिए निमित्त बनी | मै बहुत छोटी थी इसलिए मम्मा ने कहा, तुम ओम निवास में रहकर ज्ञान-योग कि पढाई करो | माता-पिता तो छुट्टी नहीं दे रहे थे | मम्मा ने मुझे युक्ति बताई कि जब माँ-बाप बहुत खुसी में हो तब जाकर तुम उनकी गोद में बैठो और प्यार से छुट्टी मांगो, अवश्य दे देंगे | ऐसे ही हुआ | एक दिन जब मेरे माँ-बाप बहुत खुश मुड़ में थे तो मैंने उनसे छुट्टी मांगी और पिता जी ने पत्रलिखकर दे दिया, साथ में माता जी के भी हस्ताक्षर करवाए | इस प्रकार, लौकिक बंधन से मुक्त कराने में मम्मा ने बहुत मदद कि |...