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 आप हिम्मत का एक कदम बढाओं तो परमात्मा की सम्पूर्ण मदद आपके साथ होगी !

Super Human Formula

Super human formula for sharp mind and superior memory power. Whichever person follows this rule, he gets a treasure of all powers and he can get a lot of future information, it has many advantages. And life becomes happy, just follow Brahmacharya in it.
 
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ज्वालामुखी योग

द्वारपाल से देह अभिमान और विकारो के वश होने के कारण मनुष्य आत्मा पर विकार्मो और पापो का बोझा बहुत है | 63 जन्मो से विकारो के वश कर्म और व्यवहार करते हुए आत्मा अपनी चमक खो चुकी है, वह धूमिल और पतित हो चुकी है | विकारो के वश ही आत्मा शक्तिहीन,कांतिहीन और तेज विहीन हो चुकी है | इसके फलस्वरूप छोटी-छोटी समस्याओं और परीक्षाओं में अधिकांश आत्माएं मुन्झतीऔर घबराती रहती है | सामना करने, समाने और निर्णय करने की शक्ति, अपवित्रता के कारण ही कम हो गई है, अतः आत्मा को सशक्त बनाने और उसे चढ़ती कला की ओर ले जाने के लिए सर्व शक्तिवान परमात्मा के गहन सान्निध्य की परम आवश्यकता है | पतित पावन आये है समस्त मानव आत्मा के लिए यह ईश्वरीय शुभ सन्देश है कि अभी पतित-पावन परमात्मा शिव स्रष्टि को पावन बनाने के लिए ब्रह्मा तन में अवतरित हुए है और वे पिछले 75 वर्षो से ज्ञान-योग की अग्नि से आत्माओं को तपाकर उनकी बुराइयों को दूर कर रहे है | लाखो ब्रह्मा वत्स उस तारणहार शिव को जान और पहचानकर राजयोग की साधना द्वारा आत्मशुद्धि और पापो से मुक्ति की साधना में लगे हुए है | अब समय है, जब संसार की शेष आत्माओं को ...

दादी धैर्यमणि

     मम्मा ने ही मुझे योग सिखाया और योग्य बनाया  ये कहानी दादी धैर्यमणि कि कहानी है जो हमें अतीत अनुभव कराती है, आइये जानते है दादी धैर्यमणि कि कहानी | क्या थी ? सन 1937 में मै पहली पहली बार अपनी बहन भगवती के साथ बाबा-मम्मा के सत्संग में गई | जाते ही मुझे मम्मा ने देख लिया गले लगाया , टोली खिलाई एवं मुस्कुराई | मै भी मुस्कुराई तो मम्मा ने कहा, कल भी आना | मै उस दिन से रोज जाती रही और ज्ञान सुनकर बहुत अच्छा लगा | मम्मा ही मुझे ज्ञान प्राप्त करने तथा यज्ञ में लाने के लिए निमित्त बनी | मै बहुत छोटी थी इसलिए मम्मा ने कहा, तुम ओम निवास में रहकर ज्ञान-योग कि पढाई करो | माता-पिता तो छुट्टी नहीं दे रहे थे | मम्मा ने मुझे युक्ति बताई कि जब माँ-बाप बहुत खुसी में हो तब जाकर तुम उनकी गोद में बैठो और प्यार से छुट्टी मांगो, अवश्य दे देंगे | ऐसे ही हुआ | एक दिन जब मेरे माँ-बाप बहुत खुश मुड़ में थे तो मैंने उनसे छुट्टी मांगी और पिता जी ने पत्रलिखकर दे दिया, साथ में माता जी के भी हस्ताक्षर करवाए | इस प्रकार, लौकिक बंधन से मुक्त कराने में मम्मा ने बहुत मदद कि |...

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