Skip to main content

Translate

 आप हिम्मत का एक कदम बढाओं तो परमात्मा की सम्पूर्ण मदद आपके साथ होगी !

Find Center

 

Click Here

For information on Brahma Kumaris center please click on the link provided above.
Om Shanti

Comments

People read the most:

अपने मन से भय को भगाए दूर

                     हम सभी अपने जीवन में जाने-अनजाने भय से रूबरू होते है | कभी यह ज्ञात का भय होता है तो कभी अज्ञात का | हम अपने भय से निजात पाना चाहते है | भय को भागने के लिए सबसे पहले स्वयं का आत्म विश्लेषण करे कि हमारे दर का कारण क्या है | जब हम अपने दर का कारण समझ जाते है तो हमारे लिए उसका सामना करना आसान हो जाता है |                                                   कई बार अमरे मन का दर अतीत में हुई किसी पुरानी घटना की वजह से भी जन्म लेता है | उदाहरण के लिए, अगर भूतकाल में कभी आपको कुत्ते ने काटा हो तो कुत्ते को देखते ही मन की स्मृति की पुरानी फ़ाइल सामने आ जाती है और भय सताता है | कुछेक बार भय का कारण किसी व्यक्ति से विशेष लगाव हो सकता है जिस कारण उसे खो देने का भय हमें सत...

बुरे ब्यक्ति का जीवन राजयोग ही बदल सकता है

जानें, 100 मर्डर करने वाला 1 करोड़ का इनामी डाकू कैसे बना ‘महात्मा’ ग्वालियर.खूंखार डाकू,चंबल के बीहड़ों का राजा,550 डाकुओं का सरदार और लगभग 125 कत्लों के आरोप में भारत सरकार द्वारा दो करोड़ रुपए का इनामी *डाकू पंचम सिंह* Dacoit Pancham Singh आज का राजयोगी बन चुका है। अब लोगों के मन को परिवर्तित करने में अपना जीवन व्यतीत कर रहा है। कभी चंबल के बीहड़ों में बंदूक की नोक पर दहशत का पर्याय रहा डाकू सरदार पंचम सिंह राजयोगी बनने के बाद देशभर में अध्यात्म की अलख जगा रहा है। पंचम ने अध्यात्म और आत्मविश्वास के बल पर जिंदगी बदलने के गुर सिखाए। 550 डाकुओं ने किया था समर्पण चंबल के बीहड़ों में दहशत के रूप में कुख्यात पंचमसिंह जमीनदारों के सताने पर परिवार का बदला लेने के लिए डाकू बने। पंचायत चुनाव के दौरान एक पक्ष का समर्थन करने पर विरोधी गुट के लोगों ने इतना बेरहमी से पीटा कि लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। इलाज के बाद जब गांव लौटा तो ग्रामीणों पर उत्पीडऩ शुरू हो चुका था। विरोधी गुट हावी था। हर किसी का जीना दुश्वार था। फिर क्या था कूद पड़े चंबल के बीहड़ों में 12 डाकु...

मिथक से सत्य की ओर

  हमारे लिए जीवन में सत्य बहुत मायने रखता है,हमारा जीवन सत्य विचार से भरा होगा तो , हमारे जीवन में खुशिया ही खुशिया रहेंगी | सत्य ही दुर्गुणों को नाश कर सकता है सत्य ही जीवन का एक सत्य है, सत्य ही ईश्वर है, | सदियो से एक विचार संसार में फैलता रहा है की यह जगत मिथ्या है, कारागृह है , असार है, इसका सुख कागविष्ठा   सामान है , यहाँ सब कुछ बंधनकर्ता है, अर्थहीन है | अक्सर जो लोग भक्ति करते है, वे भगवान् से यही प्रार्थना करते है की हमें भाव के फेरे से छुडाओ , चौरासी के चक्र से निकालो | इसलिए कई घरबार और देह सम्बन्धो को छोड़ संन्यास ले लेते है कि हम ऐसी शधना करेंगे सिस्से मोक्ष मिल जाये | जब कभी भी महात्मायें ,धर्मात्माये, योगी-संतजन शरीर धारण करना और छोड़ते है तो कहा जाता है कि वे पार निर्वाण चले गए,लौ में लीन हो गए | ऐसा भी माना जाता रहा है कि बारम्बार शरीर धारण करना और छोड़ना यह हमारे ही पापकर्मो की सजा है | हम जो कुछ करते है उसका धर्मराज के दरबार में चित्रगुप्त के चौपड़े में (बही-खाते में)   हिसाब-किताब रखा जाता है और उसके दंडरूप आत्मा को इस मोह-माया भरे स...

Labeles

Show more

Followers

Total Page Views