हमारे लिए जीवन में सत्य बहुत मायने रखता है,हमारा जीवन सत्य विचार से भरा होगा तो , हमारे जीवन में खुशिया ही खुशिया रहेंगी | सत्य ही दुर्गुणों को नाश कर सकता है सत्य ही जीवन का एक सत्य है, सत्य ही ईश्वर है, | सदियो से एक विचार संसार में फैलता रहा है की यह जगत मिथ्या है, कारागृह है , असार है, इसका सुख कागविष्ठा सामान है , यहाँ सब कुछ बंधनकर्ता है, अर्थहीन है | अक्सर जो लोग भक्ति करते है, वे भगवान् से यही प्रार्थना करते है की हमें भाव के फेरे से छुडाओ , चौरासी के चक्र से निकालो | इसलिए कई घरबार और देह सम्बन्धो को छोड़ संन्यास ले लेते है कि हम ऐसी शधना करेंगे सिस्से मोक्ष मिल जाये | जब कभी भी महात्मायें ,धर्मात्माये, योगी-संतजन शरीर धारण करना और छोड़ते है तो कहा जाता है कि वे पार निर्वाण चले गए,लौ में लीन हो गए | ऐसा भी माना जाता रहा है कि बारम्बार शरीर धारण करना और छोड़ना यह हमारे ही पापकर्मो की सजा है | हम जो कुछ करते है उसका धर्मराज के दरबार में चित्रगुप्त के चौपड़े में (बही-खाते में) हिसाब-किताब रखा जाता है और उसके दंडरूप आत्मा को इस मोह-माया भरे स...
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