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संबंधो में रमणीकता

संबंधो में रमणीकता

सम्बन्ध जीवन जीने के लिए निहायत जरुरी है | संबंधो को सजीव, सार्थक और मधुर बनाये रखना जीवन की अनिवार्यता है | यदि परस्पर सम्बन्धो  में नीरसता हो, कड़वाहट और रुक्षता हो, एक ऊष्मा, उत्साह और ख़ुशी का अनुभव न हो, तो सम्बन्ध जड़वत रह जाते है | एक दुसरे को कोई प्रेरणा या कोई ऊर्जा मिल नहीं पाती | इसलिए यह जरुरी है कि आपसी संबंधो में शालीनता के साथ-साथ रमणीकता का पुट हो | रमणीकता संबंधो को सरस और सुखदायी बनाती है | रमणीकता का अर्थ सिर्फ हास्य और विनोद नहीं है, बल्कि रमणीकता का अर्थ आपसी व्यवहार की सुन्दरता, सरसता और मधुरता भी है |कोई भी बात खड़ी भाषा में कहने की अपेक्षा यदि रमणीकतासे उसका प्रस्तुतिकरण किया जाए, तो वह अधिक ग्राह और प्रभावशाली होती है |राम्निकता व्यक्ति गंभीर और बड़ी से बड़ी बात भी बड़ी सादगी और सरलता से कह सकता है | यदि दूसरों की त्रुटियाँ भी रमणीक अंदाज में बताई जाती है, तो सम्मुख व्यक्ति उसका बुरा नहीं मानता, बल्कि उसका ध्यान अपनी गलतियों पर सहज ही चला जाता है |

मर्यादा और संयम रुपी अंकुश भी जरुरी

संबंधो में रमणीकता का अर्थ यह नहीं है कि हम सदा हलके-फुल्के हँसी-मजाक करते रहे, ठिठोली करते रहे, ठहाके लगाते रहे | रमणीकताहमेशा संबंधो की गरिमा के अनुरूप संयमित और मर्यादित होनी चाहिए | साथ-साथ समय और परिस्थिति अथवा उचित अवसर को ध्यान में रखते हुए ही रमणीकता का प्रयोग किया जाना चाहिए | असमय हास्य,विनोद करना अथवा अमर्यादित तरीके से किसी का मजाक बनाना संबंधो की गरिमा के विपरीत है और इससे दूसरों की भावना भी आहत होती है | इसलिए रमणीकता के साथ-साथ संयम व् मर्यादा तथा शालीनता का समिश्रण भी उतना ही जरुरी है, परन्तु साथ ही यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि हम इतने अधिक गंभीर और आत्ममुखी न बने, जो हमारे व्यव्हार से दूसरों को एक उबाऊ,निरस्त और उदासी का बोध होने लगे, क्योंकि ऐसा होने पर लोग हमारे निकट संपर्क में आना नहीं चाहेंगे और उन्हें उत्साह और ख़ुशी का अनुभव नहीं होगा | इसलिए यह याद रखे कि शालीनता के साथ-साथ रमणीकता भी उतनी ही जरुरी है और यही संबंधो का आकर्षण और उसकी ऊष्मा

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