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 आप हिम्मत का एक कदम बढाओं तो परमात्मा की सम्पूर्ण मदद आपके साथ होगी !

मै कहाँ खो गया हूँ.............?




जब हम किसी भी प्रोफेशनल या आम व्यक्ति से बात करते है तो वो अपनी समस्याओं के बारे में, परिस्थतियों के बारे में और कठिनाइयों की ही बात करता है | वो अपनी सूझ-बूझ, अपने परसेप्शन और मान्यताओं के आधार से उसके हल भी ढूँढने की कोशिश करता है, परन्तु वो अपनी उन कठिनाइयों को दूर करने के चक्कर में और ही उलझता जाता है | वो अपनी आकांक्षाओं,इच्छाओं व् सामाजिक,पारिवारिक दायित्व के निर्वहन हेतु कई शार्ट कट का रास्ता भी अपनाने की कोशिश करता है | परिणामस्वरूप वो अपनी उलझनों के भंवर में और ही उलझता हुआ अपने को पाटा है | उदाहरण स्वरुप,किसी व्यक्ति के घर में चूहे बहुत थे और खाघ पदार्थ को नुक्सान पहुंचाते थे | तो किसी ने कहा कि ऐसा करो, एक बिल्ली को पाल लो, जिससे आपकी समस्या हल हो जायेगी | वो बिल्ली ले आया, बिल्ली चूहे को तो खा जाती , लेकिन साथ ही उसका रखा हुआ दूध भी पि जाती | वो फिर परेशान होने लगा | फिर किसी और ने सलाह दी कि ऐसा करो की कुत्ता पाल लो | कुत्ते के कारण तो बिल्ली भाग गयी, लेकिन कुत्ता सारा दिन भौं-भौं करके उसका सर दर्द कर देता था | आज वैसी ही हालत हम सबकी है | हम ढूंढनातो चाहते है हल,समस्याओं का समाधान, परन्तु एक समस्या के चक्कर से छुटने के बदले और एक समस्या हमारे जीवन से जुड़ जाती है हाल ही में ज्ञानसरोवर में हुए मीडिया कॉन्फ्रेंस के दौरान कई सारे आपसी डिस्कशन, डायलाग हुए जिसमे ब्राडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन के महासचिव एन.के सिंह ने बहुत तर्कपूर्ण उत्तर दिए | उन्होंने कहा कि यहाँ मैंने देखा कि इस संस्थान के भाई बहनो के चेहरों में जो संतुष्टता और ख़ुशी व् सुकून दिखाई देता है, वो मुझे कही और नहीं दिखता | समस्याए बेशक इनके सामने भी आती होगी, कोंकी ये भी तो कलियुग में ही रहते है, लेकिन विचार करने कि बात है की ऐसी विपरीत परिस्थितियों में रहते भी ये अपने आप को खुश कैसे रख पाते, ये खोज का विषय है |
हम आज सारी समस्याओं का समाधान अपने परसेप्शन के आधार से ढूंढने कि कोशिश करते है, लेकिन पाते है की हर कही जहाँ भी किसी को छुते है तो वहां समस्याओं का तात्कालिक निपटारा हो भी जाता है लेकिन फिर एक नई समस्या हमारे जीवन में जुड़ जाती | ऐसे में निष्कर्ष यही पाया की समस्याओं का हल हम बाहर से ढूंढने की कोशिश करते है, लेकिन समस्याओं का समाधान तो हमारे भीतर से ही मिल पायेगा | राजयोग मेडिटेशन एक ऐसी विधि है जहाँ ‘इन टू आउट’ की कला को निखारा जाता है | अगर देखा जाए तो व्यक्ति के जीवन की चाहत भी क्या है, सुख, शांति, प्रेम,आनन्द,शक्ति,ज्ञान, पवित्रता | इसी को पाने के लिए ही तो वो सारे दिन दौड़ता भागता रहता है | लेकिन जरुर है, कि कोई भी माता-पिता अपने बच्चो को खुश और आगे बढ़ता हुआ ही देखना चाहते है | अगर हम बोलचाल की भाषा में कहते भी है कि परमात्मा हमारा माता-पिता है तो भला वो भी हमें दुखी कैसे देख सकता है ! उन्होंने हमें सारी शक्तियाँ और गुणों से सुसज्जित कर इस स्रष्टि पर खेल खेलने के लिए भेजा, परन्तु हम खेलते खेलते अपने आपको भूल गए और अपनी शक्तियों को भी व्यर्थ में ही खर्च कर दिया, उसे खो दिया | परिणाम स्वरुप आज हम हर बात में चिल्लाते, मांगते फिरते है | हमने परमात्मा प्रदत्त शक्तियों को कार्यों में प्रयोग ही नहीं किया, ना ही उसके तौर तरीके और विधि को ही हम जानते है | जब हम परिस्थितियों का निर्माण इस धरा पर होता है | तब परमात्मा पुनः राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से ज्ञान देकर फिर से हमारी उर्जा को पुनर्जीवित करते है | पर शर्त यह की जहाँ विधि से सिद्धि मिलती है तो विधिपूर्वक उसका प्रयोग करे, तभी जीवन में जीवन में आने वाली कठिनाइयों, समश्याओं और परिस्थितियों को प्रसन्न रहकर उनका निवारण कर सकते है | कहते है ना, हमने समस्याओं का समाधान बाहर ढूंढने की कोशिश की, पर हमें यह मालुम ही नहीं था कि हमारी सभी समस्याओं का समाधान हमारे पास ही है | किसी ने खूब कहा है ‘जिन्दगी भर एक ही भूल करते रहे, धुल थी चेहरे पर और आइना साफ़ करते रहे’ | समस्याएं मनुष्य खुद ही अपने गलत तौर-तरीके से उत्पन्न करता है, और फिर हल ढूढने की कोशिश बाहर करता है |
एक कहानी भी है की, एक वृद्ध महिला अपनी झोपड़ी में बैठ अपना झोला खोलकर कोई छोटी सी वस्तु  खोजने लगी | वहां अँधेरा था, और वो वास्तु वहां नीचे गिर गई जो मिल नहीं रही थी | वो बाहर रास्ते पर स्ट्रीट लाइट की रौशनी में वो वस्तु ढूंढने लगी, इतने में चार युवक वहां से जा रहे थे | उन्होंने देखा और कहा अम्मा, क्या ढूँढ रही हो ? उसने उत्तर दिया, तो वे सभी चारो युवक खोजने में उसकी मदद मदद करने लगे | ऐसे में एक और महिला वहां से गुजर रही थी, उसने भी यह देखा कि एक वृद्ध महिला और चार युवक कुछ ढूँढ रहे है, प्रत्युत्तर में वृद्ध महिला ने कहा कि मेरी वस्तु गम हो गई है, उसे ही खोज रहे है | दूसरी महिला ने कहा, आपकी वस्तु कहाँ गम हो गई ? तो वृद्ध महिला ने कहाँ कि वो तो झोपडी में गिर गई है, वहां गम हो गई है | तब दूसरी महिला ने कहाँ कि जब वहां वहां गम हुई है तो वहां खोजना चाहिए ना, यहाँ क्यों ढूँढ रहे है | तब वृद्ध महिला ने कहा कि झोपड़ी में अँधेरा है, इसलिए दिकाही नहीं पड़ती, इसलिए हम उजाले में यहं ढूँढ रहे है | ठीक वैसे ही आज हर व्यक्ति आज हर व्यक्ति इसी दौर से गुजर रहा है | वो चाहता है तो अपने जीवन में शांति और ख़ुशी, परन्तु वो ढूंढता  कही और है | ऐसे में आज हम तो यही कहेंगे कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय  इस विश्व के सामने एक विकल्प के रूप में उभर रहा है, जो ये ज्ञान देकर समस्याओं का समाधान दे रहा है |

 

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