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 आप हिम्मत का एक कदम बढाओं तो परमात्मा की सम्पूर्ण मदद आपके साथ होगी !

राजयोग के अभ्यास से निर्भय और निश्चिंत रहे



कहते है, भगवान् ने मनुष्य को रचा अपने खुले दिल से | उसने मनुष्य की ख़ुशी और अच्छी फिलिंग के लिए साथ में खूबसूरत मन भी दिया | मन में जैसे विचार,वैसी फिलिंग, ये शर्त भी रख दी | विअसे तो कहते है कि माइंड इज पॉवर, अर्थात विचार शक्ति | हम किसी भी विचार का मन में निर्माण करते है तो उसके पॉवर के वायब्रेशन हमारे शरीर और प्रकृति में फैलते है, चाहे बो अच्छे विचार हो या बुरे | यदि हम अच्छे विचार और अच्छी फिलिंग में जीना चाहते है तो सकारात्मक, शुभ व श्रेष्ठ संकल्पों के साथ जिए और यदि नकारात्मक फिलिंग और दुःख के साथ जीना चाहते है तो नकारात्मक विचार क्रियेट करे | कौन नहीं चाहेगा कि हमें जीवन में अच्छी महसूसता हो | तो आइये हम जाने कि कैसे खुद भी अच्छी फिलिंग के साथ रहे और अच्छे वायब्रेशन वायुमंडल में फैलाये |
मन के प्रकम्पन ही हमें दूसरो के पास या उनसे दूर ले जाते है, हम Vibrations के सिद्धांत द्वारा पड़ोसियों की भी समस्याओं को दूर कर सकते है | सवेरे उठ स्वमान धारण करे – मै आत्मा मास्टर सर्वशक्तिमान हूँ,
फिर उनको भ्रकुटी के बिच चमकती आत्मा देख संकल्प करे, ये तो मी गुड Friends है, मेरे शुभचिंतक है, हमारे बिच सब कुछ ठीक हो जाएगा |Spiritual power आपको इअसे संकप करने में मदद करेगी | परमात्मा से बहुत अच्छा Connection जोड़े और उन्हें भी मदद देने के लिए आग्रह करे |
मन में भय का कारण आपके पूर्व जन्म या इस जन्म के कुछ बुरे अनुभव हो सकते है | इसको दूर करने के लिए दिन में 108 बार इस स्वमान की Practice करे-मै आत्मा अजर,अमर,अविनाशी हूँ,मै आत्मा शिव शक्ति हूँ, शिव शक्तियाँ मेरे पास है | सुबह उठते ही कम से कम सात बार संकल्प करे – मई आत्मा मास्टर सर्वशक्तिमान हूँ, विर्भय हूँ | घर से कही बाहर जाने से पहले संकल्प करे की मेरे साथ सर्वशक्तिमान है, उनकी छत्रछाया में मै सुरक्षित हूँ | कुछ विशेष प्राप्ति हेतु मास्टर सर्वशक्तिमान के स्वमान का उपयोग करे | भगवानुवाच- जो मास्टर सर्वशक्तिमान का अभयस करते है वे अपनी संकप शक्ति द्वारा बहुत कुछ कर सकते है |
         
           अपराध बोध की समाप्ति और योग से प्राप्तियाँ

स्वयं परमात्मा ने आकर हमें हमारा और स्वयं का परिचय दिया है, स्रष्टि चक्र का ज्ञान समझाया है | उन्होंने ही राजयोग की शिक्षा प्रदान कर हमारी सभी उलझने समाप्त कर दी है | इस योग के द्वारा हम वह करने में सक्षम हो गए जो हम करना चाहते है क्योंकि योग से ही मन की शक्ति, बुद्धि की शक्ति बढ़ जाती है और उनका शुद्धिकरण होने लगता है | योगबल से अपने आप ही संस्कार परिवर्तन होने लगते है, दिव्य संस्कार हममे प्रवेश करने लगते है |
मन में अपराध बोध होने का कारण है देह-अभिमान और माया से हार | इस अपराध बोध को नष्ट करने के लिए हमें मन में दृढ़ संकल्प रखना चाहिए की मुझे अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ना है | Hard Worker बने, आलस्य-अलबेलेपन  से दूर रहे | दूसरो को आत्मा देखने की Practice करे | परमात्मा से योग लगाकर पवित्र बनने की शक्ति ले | पञ्च स्वरूपों के अभ्यास से से वासनाओं को नष्ट करे | एकांत में रहकर अपने से बाते करे, अपने संकल्पों को और भी अधिक दृढ करे | वृत्ति को पावन बनाने का व्रत धारण करे |
कुछ स्वमान :- 1. मै देवकुल की महान आत्मा हूँ | 2. मै मास्टर सर्वशक्तिमान आत्मा हूँ | 3. मै विजयी रत्न हूँ | 4. मै पूज्य आत्मा हूँ | सवेरे अवश्य उठे |

योग का प्रयोग कहाँ किया जा सकता और कहाँ नहीं

राजयोग का प्रयोग आत्मशुद्धि,शांति, विघ्न को हटाने के लिए आदि जन कल्याण के कार्यो में ही किया जा सकता है | किसी से बदला लेने , स्वार्थ की भावना से किये गए कर्मो के लिए, वासनात्मक प्रेम आदि को प्राप्त करने हेतु प्रयोग नहीं किया जा सकता | उन परिस्थितियों में योग के प्रयोग से उलटे परिणाम ही देखने को मिलेंगे, क्योंकि राजयोग पवित्रता का मार्ग है, इसके दिव्य अनुभव उन्ही आत्माओं को प्राप्त हो सकते है जिनकी मनोस्थिति अच्छी रही हो, जो शुरू से ही चरित्रवान रहे हो, या जिनके पुण्य कर्मो का खता काफी अधिक हो आदि , परन्तु मन में अगर दृढ संकल्प आ जाए की अब मुझे पवित्र बनना है तो योग से सफलता प्राप्त अवश्य होगी आ युवावर्ग में वासनात्मक प्रेम की समस्या बहत देखने में आती है, इस विषय में वह अपने माँ-बाप की नकारात्मक Energy  उनके लिए निकलती है, वह कार्य सफल हो नहीं सकता, और यह भी याद रखे कि उन्हें जल्दी ही भावनाओ में बह नही जाना चाहिए, तोडा धैर्यवत होकर जीवन के निर्णय लेने चाहिए |
माता-पिता को यह चाहिए कि वे शुरू से ही अपने बच्चे को ऐसी पालना दे जिससे उनका मन इतना मजबूत हो जाए कि उनका ध्यान इधर-उधर जाए ही  नहीं | वे बच्चो को शुरू से ही प्रेम दे, उनके अच्छे मित्र बनकर रहे उनका तिरस्कार ना करे, उन्हें धुत्कारे नहीं और उनसे आदेशात्मक रीती से बात न करे जिससे बचपन में ही उनकी खुसी नष्ट न हो जाए, उनमे अलगाववादी विचार उत्पन्न न हो | वे आपकी इज्जत करे, उलटे जवाब न दे | Honour Killing  जैस कार्य करने से खुद को रोके क्योंकि इससे खेल और ही बिगड़ जाता है |

विधिपूर्वक राजयोग द्वारा विध्नो पर विजय

विधि द्वारा किसी भी करनी को करने से सिद्धि अवश्य प्राप्त होती है | राजयोग का अभ्यास भी अगर विधिपूर्वक किया जाए तो विध्नो का विनाश सरल तरीके से किया जा सकता है | कुछ सहज उपाय – 21 रोज का नियम पालन अवश्य करे | उसमे प्रत्येक दिन 1 घंटा निकलकर एकाग्रता से राजयोग का अभ्यास करे | समय और स्थान भी निश्चित हो | शुरुआत में 7 बार स्वमान का अभ्यास करे – मै आत्मा मास्टर सर्वशक्तिमान हूँ, विघ्न विनाशक हूँ | अंग-अंग से शक्तियों की किरण फ़ैल रही है हमेशा अभ्यास करते रहे तब आप विघ्नों पर विजय प्राप्त कर सकते है |

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