Skip to main content

Translate

 आप हिम्मत का एक कदम बढाओं तो परमात्मा की सम्पूर्ण मदद आपके साथ होगी !

समस्या को सुअवसर में परिवर्तन करने की कला





जीवन में सफलता पाने या महान बनने की बात जब आती है तो अधिकांश लोगो की शिकायत यह होती है कि उनको विशेष बनने का अवसर ही नहीं मिला, अदृष्ट ने उनका साथ नहीं दिया इसलिए वे कुछ कर नहीं पाए ! क्या यह कारण उचित लगता है ? इतिहास प्रसिद्ध दिग्गजों के पास सुअवसर मिला, वही महँ बना बल्कि महान वो बना जिसने कठिनाई को ही सुअवसर में परिवर्तन करके दिखाया |

सांप का जहर मृत्यु के समान है लेकिन मानव ने उसको ऐसे परिवर्तन कर दिखाया कि कुष्ठरोग (मृत्यु से भी भयानक) से मुक्ति पाने की औषधि बना दिया | मृत्यु रुपी विष ही, जीवन को असफल, व्यर्थ बनाने वाली बातो को परिवर्तन कर सफलता का आधार बना लेना, इस कला से एक साधारण मानव, महामानव बन सकता है | ऐसे प्रसिद्ध महापुरुष जिन्होंने कठिनाइयों को ही सुअवसर के रूप में परिवर्तन कर सफलता पाई, उनमे से तीन उदाहरणों को यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है |

इस दुनिया में दो स्थान है जहाँ कोई भी जाना नहीं चाहते | एक है कब्रिस्तान और दूसरा है कारागृह | समझते है, कारावास तो मृत्यु से भी बड़ी सजा है | भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले एक क्रांतिकारी तरुण को ब्रिटिश सरकार ने मिथ्या आरोप लगाकर जेल भेजा | सलाखों के पीछे पड़ा व्यक्ति दो ही काम कर सकता है |

वहां से भागने की कोशिश करता है या अपनी तक़दीर पर अफ़सोस लेकिन इस युवक की विचारधारा ही अलग थी | इस युवक ने सोचा कि जीवन व्यर्थ करने वाई सजा को ही जीवन को सार्थक बनाने वाले अवसर के रूप में क्यों न परिवर्तन कर दूँ ? इसी दृढ संकल्प से उसने अँधेरे कमरे में आध्यात्मिक  साधना आरम्भ की | अभ्यास करते – करते यह अनुभव किया कि यह काराग्रह नहीं बल्कि दुःख-अशांति भरी बहिर्मुखी दुनिया से अलग अन्तर्मुखता की साधना गहरी और परिपक्व होती गई |  उसने दुःख देने वाले अकेलेपन को सुखी बनाने वाले एकांतवास में परिवर्तन कर लिया | कैदी बनकर अन्दर गए और महँ दार्शनिक बनकर बाहर निकले | उस युवक का नाम था अरविन्द घोष जिन्होंने महर्षि बनकर केवल भारत को ही नहीं बल्कि पुरे विश्व को बयाँ का दर्शन कराया |


एक छह साल का बालक रेलगाड़ियो में अख़बार बेचता था | एक दिन गाड़ी में बहुत भीड़ थी और गाड़ी चल चुकी थी | फिर भी यह बालक उसमे चढ़ गया लेकिन अन्दर जा नहीं पाया, एक ही हाथ से ट्रेन को पकड़े हुए लटक रहा था | कुछ देर बाद बालक अपना नियंत्रण खोकर गिरने ही वाला था कि एक व्यक्ति ने बालक को बचने के लिए उसके दोनों कान पकड़कर रेल के डिब्बे के अन्दर खीच लिया | क्या कहें ! विधि की लीला !! पुरे शरीर का भर कानो पर पड़ने से कानो को अन्दर से चोट लगी गयी और डॉक्टरों ने कहा कि बालक को जीवनभर बहरा होकर जीना पड़ेगा | अब कहिये, एक तो इतनी कम उम्र और बहरा भी, क्या आपको लगता है कि आगे चलकर यह बालक कुछ कर पायेगा ? यह बालक था सर थामस आल्वा एडिसन, विश्वप्रसिद्ध वैज्ञानिक जिसने बल्ब का आविष्कार करके साड़ी दुनिया को रौशनी दी | यह कैसे संभव हुआ ? सर एडिसन हँसते हुए कहते थे कि बहरेपन ने ही तो मुझे वैज्ञानिक बनाया | आवाज की दुनिया से परे रह विज्ञान की गहराई में जाकर आविष्कार करने का सुअवसर बहरेपन से मिला, यह मेरे लिए श्राप नहीं बल्कि वरदान था | वास्तव में बहरापन वरदान नहीं है लेकिन सर एडिसन श्राप को भी वरदान के रूप में परिवर्तन करने की कला के द्वारा महँ व्यक्ति बने |


तीन साल का एक बालक अपने पिता के औजार से खेल रहा था | खेलते-खेलते औजार आंख पर लग गया और आंख चली गयी | लापरवाही के कारण दूसरी आंख में भी रोग लग गया और कुछ ही दिनों बाद बालक पूरा अँधा हो गया | क्या कोई सोच सकता है कि इस दुःख के पहाड़ को कल्याण में परिवर्तन किया जा सकता है ? लेकिन उस बालक ने करके दिखया | उसने सोचा, इस दुनिया में मेरे जैसे कितने होंगे जो रौशनी से वंचित है और दुनिया के सौन्दर्य को देख नहीं सकते ? वह एक ऐसी कल्याणकारी घडी थी जब बालक के मन में दृढ संकल्प ने जन्म लिया कि अन्धो के लिए ऐसे आलेख का अनुसन्धान किया जाना चाहिए जिससे वे न देखते हुए भी इस दुनिया को अनुभव करे और सार्थक जीवन जियें | अपने दर्द का परिवर्तन कर इस बालक ने ऐसी चीज बनाई जो औरो के दर्द का शमन करे |वह बालक था सुप्रसिद्ध ब्रेइल लिपि का अन्वेषक लुईस ब्रेइल |



आध्यात्मिक मार्ग पर द्रढ़ता से चलने वाली एक माता का पुत्र किसी बात पर उससे नाराज हो उठा और क्रोध की बेहोसी में माँ को थप्पड़ लगा दिया | कहिये, क्या इससे बढ़कर अकल्याणकारी घटना और कोई हो सकती है ? ऐसी माता से अधिक दुखी इस दुनिया में कोई मिल सकता है ? नहीं ना ? लेकिन परिवर्तन करने की कला ने ऐसा जादू दिखाया, वह माता मुस्कुराते हुए कहने लगी, “नहीं,वह थप्पड़ नहीं था बल्कि जिस मोह के जाल को जितने में मेरी पूरी आयु लग सकती थी, उस जाल से छुड़ाने वाला एक शक्तिशाली अस्त्र था वह | जैसे ही थप्पड़ लगा, एक क्षण में होम ने विदाई ले ली और मै भगवान के प्यार में लीन हो गई |” दुःख में फंसाने वाली बात को दुःख से छुड़ाने वाले अस्त्र के रूप में स्वीकार करना, यह है परिवर्तन की कला |




जैसे पर्वतारोही अपने सामने आने वाले हर पत्थर को सीढ़ी  समझकर उसी के आधार से शिखर पर पहुच जाता है वैसे ही, सामने आने वाली हर समस्या को अगर अवसर के रूप में परिवर्तन करने की कला प्रयोग में लायें तो हम भी सफलता के शिखर पर विराजमान हो सकते है | समस्या को अवसर में परिवर्तन करने के लिए पुरुषार्थी को अपना संस्कार परिवर्तन करना होगा, जो सहज राजयोगाभ्यास  का मुख्य उद्देश्य है | देखा गया है कि कई पुरुषार्थी आत्माएँ भगवान से कई प्रकार की प्रार्थनाये करती है – “बाबा फलानी परिस्थिति, व्यक्ति या स्थान के कारण मेरा पुरुषार्थ रुक गया है, आप उसे दूर कर दो या फलाने व्यक्ति या स्थान से दूर ले चलो तो मै आगे बढ़ सकूँ |’ कितनी आश्चर्यजनक बात है ! क्या आपने कभी सुना कि परीक्षा में बैठने वाला कोई विद्यार्थी भगवान से इस तरह प्रार्थना करे कि भगवान इस परीक्षा को दूर करो तो मै उत्तीर्ण होकर आगे बढ़ सकूँ ? असंभव का स्तर निम्न वर्ग से उच्च वर्ग में परिवर्तन होता है | वैसे ही समस्या आना भी एक विधि है जिसको अवसर में परिवर्तन करके हम सिद्धी को प्राप्त कर सकते है |




सेवासथी कठोर है, क्रोधी है, निंदा करता है तो हम उस क्रोध – निंदा को अपनी सहनशक्ति को बढ़ने के साधन के रूप में, टीका-अवहेलना-अपमानित करने वाली बातो को सामने की शतकी के प्रशिक्षण के रूप में, औरो की नफरत-वैर-विरोध को लगाव-झुकाव की जंजीर से मुक्त करने वाले अस्त्र के रूप में , साधन-सुविधाओ के आभाव को इच्छा मात्रम अविद्या स्थिति के अभ्यास के रूप में ,अशांति फलने वाली, हलचल मचाने वाली बातो और घटनाओं को शांतिधाम की ओर बुद्धि खीचने वाले चुम्बक के रूप में , शारीरिक पीड़ा को अशरीरी स्थिति के अभ्यास कराने वाले शिक्षक के रूप में, लौकिक-अलोकिक परिवार से स्नेह-प्यार नहीं मिल रहा है, तो अहो सौभाग्य है ! उस स्नेह की कमी को प्रेमसागर  शिवपिता के अखंड प्रेम की अनुभूति कराने वाले अवसर के रूप में, अकेलेपन की वेदना को एक बाप दूसरा न कोई इस श्रेष्ठ अवस्था के आसन के रूप में परिवर्तन करे |



जब आकाश को काले बादल घेर लेते है, बादलो की गडगडाहट कान पर थपकती है, बिजली ही बिजली आँखों में कौंधती है, तो क्या कभी आपने सुना कि लोग भगवान से प्रार्थना करे कि इन बादलों दूर हटाओं ? नहीं | बलि चारो तरफ ख़ुशी फ़ैल जाती है, वातावरण में उमंग-उत्साह भर जाता है कि अब यह भयानक द्रश्य परिवर्तन होकर जलवर्षा का सुन्दर द्रश्य साकार होगा जो कि मानव-पशु-पक्षियों के जीवन का आधार है | समस्या को नहीं बल्कि समाधान को देखा जाता है | वैसे ही व्यक्ति,परिस्थिति या स्था, जो समस्या का विकराल रूप धारण कर आया है, को देख इस वास्तविकता को समझना है कि यह समस्या नहीं बल्कि गुप्त रूप में आया हुआ एक अवसर है जो मंजिल पर ले लाने वाला  है | मुझे केवल इतना ही करना है कि इस विकराल रूप को अवसर के रूप में परिवर्तन करना है |

जितनी बार हम समस्या को अवसर के रूप में परिवर्तन करेंगे उतनी बार  हमारे द्वारा एनी आत्माओं के समक्ष ज्ञान-गुण और शक्तियों की प्रत्यक्षता होगी  जिससे गुप्त वेश में आये हुए शिवपिता की प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा |


Comments

People read the most:

कर्मो की गुह्य गति

r कर्मो की गुह्य गति h xqâ xfr आज भोले बाबा ने कर्मो की गति को दर्शाया और सतयुग के बारे में भी बताया | भोले शिवबाबा ने कहा कि बच्चा गर्भ में आता है तब भी वह गर्भ जेल में अपने कर्मो की सजा ही भोगता है | गर्भ जेल है एक बंद कोठरी में इस इस नाड़ीयो से बंधा होता है | अन्दर कितनी नाड़ीयो में फंसा रहता है यही कर्म भोग है जब बच्चा जन्म लेता   है तो अपनी सजा काटकर जन्म के बाहर आकर फिर उल्टा कर्म कर सजाओं का पात्र बन जाता है| भोले बाबा ने आज मुरली में यह भी कहा जो बच्चे जन्म लेते कमजोर अपंग पैदा होते है | वह भी उनके पूर्व जन्म की ही भोगना है | एक तो गर्भ में सजा खाते है और जब जन्म ले बाहर संसार में आते है तो जन्म से ही अपंग कमजोर होते है | यह भी इनका पिछला बहुत ज्यादा विकर्मो (पापो) के किये हुए होते है | यह उनकी सजा भोगना है | बाबा कहते कि कोई कोई   बच्चे विस्तार में पड़े रहते है | कमजोर अपंग होते है न बोल सकते है न चल सकते है | और उनके माता पिता सालो उनकी सेवा करते रहते है देखो कर्म का भोग तो आत्मा कर ही रही है फिर उस आत्मा की सेवा के लिए कोई न कोई निमित्त बन ही जाता   है ...

Big Discovery in the Universe: The Bridge in the Middle of the Galaxy

  Big Discovery in the Universe: The Bridge in the Middle of the Galaxy   80% of the dark matter has been used to connect and create the universe. This is such a mysterious substance that scientists have been studying for the last several decades, while preparing this map, some scientists got such information which is really surprising. Scientists at Pennsylvania State University said that the mysterious and hidden bridges that have been seen between the galaxies are filamentary, that is, they look like a spider web, due to this bridge and the dark matter has formed a cosmic trap. This means that there can be such a bridge between our galaxy and any other galaxies, scientists believe that it is a bridge due to the gravitational force that forms between the two galaxies. Can be pulled from one Galaxy to another or sent back.   Donghui Jeong, an associate professor at Penn State University and one of the authors of this study, said that the study of remotely locat...

High-Rise or HIgh Risk

  ...<High-rise or High Risk?>... Most of the urban skyline in cities around the world is characterized by high-rise buildings. These tall structures have become a symbol of modern civilization and progress. The High-rise buildings came up to resolve the increasing pressure of housing in high population density urban areas. But in several cases these concrete jungles have sprouted mindlessly, with scant regard to the overall wellness of people who live in them.                                                    The history of high-rises may be traced back to the pyramids of Egypt (about 48 storey’s in height). In modern history, tall structures were not built until the late 1600s, apart from a few Roman apartment buildings of six or seven storey’s and Europe’s Gothic cathedrals. Tall buildings with iron skeletons began to be const...

Labeles

Show more

Followers

Total Page Views