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एकाग्रता कि शक्ति


एकग्रता की शक्ति  

आपने कभी किसी मदारी को करता दिखाते हुए अवश्य देखा होगा | जरा सोचिये , कंधे पर लाठी रखे उसके एक सिरे पर कपडे कि गठरी में कुछ जरुरत कि चीजे कुछ का सामान बांधे पेट भरने के लिए पैदल चलता इन्सान कितनी लगन और एकाग्रता के साथ कितने समय तक जानवरों और बच्चों के साथ अपने करतब दिखने का अभ्यास करता होगा
बता बाबू जी के हाथ में क्या है |
ऐसी मेहनत, लगन एवं एकाग्रता का अनुभव मुझे ट हुआ जब कुछ वर्ष पूर्व एक चौराहे पर, एक आदमी अपने दस-बारह वर्ष के बच्चे के साथ आया | उसने उस बच्चे को जमीं पर चादर बिछाकर लेटा दिया, फिर चौकोर बड़ी टोकरी से ढक दिया, ऊपर से कई मोटे-मोटे कपडे डाल दिये | तमाशा देखने वाले लोग चारो ओर बड़ा गोल घेरा बनाकर खड़े हो गए | मदारी टोकरी में बंद बच्चे से पूछता गया , अच्छे बता, बाबूजी के हाथ में क्या है?
टोकरी में बंद बच्चा एक-एक कर सही जवाब देता गया-‘छाता घड़ी थैला , छड़ी आदि|
तमासा  देखने वालो में उसी चौराहे पर डयूटी दे रहे दो सिपाही भी शामिल हो गए| उनमे से एक सिपाही ने सोचा कि यह माद्री सभी लोगो को बेवकूफ बना रहा है, इसने ड्रम से , बच्चे को चीजो कि लिस्ट रटा राखी है, उसी क्रम में यह पुच लेता है और अच्छा आसानी से बता देता है मदारी कि इस कारगुजारी का पर्दाफाश  करने  कि नियत से सिपाही ने मदारी को बीच में रोकते हुए कहा कि तुम्हरा यह खेल झूठा है| यदि सचमुच तुम्हारा लड़का हर चीज के बारे में जनता है तो मै जो पुच रहा हूँ उसे बताये मदारी बोला हाँ बाबूजी अच्छा अवस्य बता देगा | सिपाही ने अपने हाथ में लि हुई रायफल कि ओर इशारा करते हुए कहा, अपने बच्चे से पूछो, इस रायफल का नंबर क्या है? मदारी ने कहा कि बाबूजी पहले इस रायफल का नंबर मै देखूंगा, तब यह बच्चा आपकी रायफल का नंबर बतायगा मदारी ने रायफल का नंबर देखा जो कई अंको का था| नंबर देखने के पश्चात टोकरी में बंद बच्चे को मदारी ने आवाज लगे कि बता बाबूजी कि रायफल का नंबर| बच्चे ने फटाफट रायफल का नंबर सुना  दिया| सब्भी दर्शको ने खूब तालिया बजाई शिपाही सर्मिन्दा हो गया|
                        निरंतर अभ्यास से ही एकाग्रता संभव  
प्रश्न पूछने वाला शिपाही बेचैन हो उठा कि आखिर यह सब हुआ क्या ? सभी दर्सक चले गए, मदारी भी सामान समेट कर चलने लगा|तभी उस सिपाही ने मदारी को अपने पास बुलाया सामने पड़ी बेंच पर बिठाया बगल के होटल से समोसे और चाय मंगा कर मदारी तथा उसके बच्चे को खिलाये | फिर पूंछा मेरी रायफल का नंबर इस बच्चे ने तब   बताया जब आपने उस नंबर को स्वाम देखा | आपके देखने से बच्चे को नंबर कैसे मालूम हो गया मदारी ने जवाब दिएया, एकाग्रता कि शक्ति से उसने आगे बिस्तर करते हुए बताया कि मेरे गुरूजी, जिन्होंने यह सा सिखया मुझे बताया कि एकाग्रता बहुत बड़ी शक्ति है| वह दिवार में एक गोला बनाकर कहते थे कि इस गोले को एकाग्र होकर देखो, जब इस गोले के अतिरिक्त कुछ भी दिखाई न दे तो बताना | फिर वे गोले को और छोटा करते गए और मुचे उस पर एकाग्र होकर देखने आ अभ्यास कराते रहे| धीरे-धीरे गोले के स्थान पर बिंदु बना दिया और कहा कि इस बुंडू मन को एकाग्र करो |  


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